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??सरकार तुम्हारी आँखों में??

Radhey shyam Pritam

Radhey shyam Pritam

कविता

November 30, 2016

सजा है जन्नत का दरबार तुम्हारी आँखों में।
खोया हुआ हूँ मैं तो सरकार तुम्हारी आँखों में।।

कोई मंदिर,मस्ज़िद,गिरजा,गुरुद्वारों में खोजे।
मुझे हो गया कुदरते-दीदार तुम्हारी आँखों में।।

पर्वत से ऊँचा,सागर से गहरा है दोस्त मेरे!
फैला ये प्यार का विस्तार तुम्हारी आँखों में।।

कौन अपना-पराया,ऊँचा-नीचा है मन-मंदिर।
सबसे समदृष्टि का व्यवहार तुम्हारी आँखों में।।

सपने में देखा न जिसकी थी हाथों में ही रेखा।
मिला सानिध्य का वो सार तुम्हारी आँखों में।।

कर्म सर्वोपरि,विजय सच्चाई को है सदा मिली।
बुराई का वस्त्र रहा तार-तार तुम्हारी आँखों में।।

“प्रीतम”तेरी प्रीत जीवन की रीत बन गई अब।
देखता हूँ सुख-दुख का संसार तुम्हारी आँखों में।

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