लघु कथा · Reading time: 1 minute

सरकारी जांच

“28 हजार अपात्र पा रहे हैं पेंशन” इस खबर ने समाज का कल्याण करने वाले विभाग और अन्य सहयोगी विभागों को भी शर्मसार कर दिया था। अफसरों को वैसे कुछ भी मालूम नहीं था, पर अखबार की खबर का संज्ञान लेकर जांच तो शुरू करनी ही थी। दफ्तर में हाय-तौबा मची थी। हर कोई खुद को बचाने की जुगत में लगा था।

खैर, जांच तो होनी ही थी सो वह कछुआ चाल से आगे बढ़ती जा रही थी। इस दौरान तमाम तथ्य जमा किए जा रहे थे, फिर पूरी जांच नहीं हो पा रही थी। अफसर पूरी कोशिश में लगे हुए थे कि किसी तरह जांच के आधार पर दोषियों को निर्दोष साबित कर दिया जाए। इसके लिए वह कुछ भी करने को तैयार थे। आखिर, एक दिन कामयाबी मिल ही गई।

एक दिन अचानक उसी अखबार ने भूल सुधार प्रकाशित किया… 25 अगस्त के अंक में “28 हजार अपात्र पा रहे हैं पेंशन” शीर्षक से खबर प्रकाशित हुई थी। खबर में कंपोजिंग की गलती से 28 की जगह 28 हजार हो गया है। इस गलती के कारण पाठकों को हुई असुविधा का हमें खेद है। खबर में भूल सुधार करते हुए 28 पढ़ा जाए। … फिर क्या था, जांच को नियोजित दिशा मिल चुकी थी। अखबार की कटिंग को आधार बनाया गया। पहले वाक्य को अंडरलाइन करते हुए जांच पूरी कर दी गई।
©. अरशद रसूल

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