.
Skip to content

सम-सामयिक दोहे

Laxminarayan Gupta

Laxminarayan Gupta

दोहे

July 20, 2016

सहिष्णु नर होता सफल, पकड़ सबूरी डोर|
असहिष्णु नर ढोर सम, चरता चारों ओर|

नगर, ग्राम, घाट, तट, सरिता की सौगात|
नारी समपुरण तभी, सीरत भी हो साथ|

बोया पेड़ बाबुल का, अपने आंगन बीच|
कांटे खुद पैदा किये, तुष्टिकरण को सींच|

महिलाएं बनकर सबल, साथ रखें हथियार|
आत्मरक्षा हेतु है, यही सिद्ध उपचार|

गाँधी टोपी पहनकर, दिया कबीरा रोय|
नेताओं की भीड़ में, गाँधी दिखा न कोय|

पड़ी सरों में भाँग है, पी-पी कर सब मस्त|
राम बचाए देश को, हुआ देश और त्रस्त|

Author
Laxminarayan Gupta
मूलतः ग्वालियर का होने के कारण सम्पूर्ण शिक्षा वहीँ हुई| लेखापरीक्षा अधिकारी के पद से सेवानिवृत होने के बाद साहित्य सृजन के क्षेत्र में सक्रिय हुआ|
Recommended Posts
घनाक्षरी- नारियों का नर सम मान होना चाहिए
घनाक्षरी- नारियों का नर सम मान होना चाहिए ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ नारियों का अपमान क्लेश की वजह एक, इसका तो सबको ही ज्ञान होना चाहिए। कष्ट देते... Read more
सत्ता से होता नही (दोहे)
सत्ता से होता नही,कोई बडा रमेश! ड्रामा यू पी का यही,देता है संदेश!! राजनीति का देश में, नहीं रहा अस्तित्व! नेता समझे देश पर, अपना... Read more
* गुस्ताख़ ये दर्द *
गुस्ताख़ ये दर्द अब हमें जीने नहीं देगा पी-पी के हारे ज़ाम अब पीने नहीं देगा रात की तन्हाई हो या दिन का सूनापन पी-पी... Read more
काँटों में खिलो फूल-सम, औ दिव्य ओज लो
धोकर के मन की कालिख मुख प्रीति चोज लो कांटो में खिलो फूल-सम औ दिव्य ओज लो जिसने भी रक्त चूस सताया है दीन को... Read more