दोहे · Reading time: 1 minute

सम भाव

चिन्ता तज चिन्तन करो, बनते बिगड़े काम
सीरत तू सम भाव रख, भली करेगें राम
शीला गहलावत सीरत
चण्डीगढ़, हरियाणा

3 Likes · 58 Views
Like
Author
226 Posts · 33.2k Views
सपने देखना कैसे छोड़ दूं सजाये अरमान कैसे तोड़ दूं हिन्दी, हरियाणवी में ग़ज़ल, गीत, मुक्तक, दोहे, रचनाएँ, लघुकथा, कहानी...... दूरदर्शन, आकाशवाणी पर पिछले पांच साल से लगातार प्रोग्राम........
You may also like:
Loading...