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समाज

Neelam Naveen

Neelam Naveen "Neel"

कविता

February 13, 2017

एक दूसरे के पुरक
मानव व समाज
खोजते हैं आपस में
अच्छे लोग,अच्छे दिन
संस्कार एवं सभ्यतायें
सुंदर भारत समृद्ध गाॅव
साफ राजनीति बेदाग नेता
जबकि हर तरफ समाज पर
आरोप लगाता धर्म जाति
पाप पुण्य तेरा मेरा की बातों
में स्वयं रोटियां भी सेकता
तंज कसते मूक से मानव
कभी कभी तुम भुल जाते हो
थोडे से प्रयासों पर पूर्ण रूप
सहमत अधिकार माँगते हो
गलतियों के पुतले कैसे तुम
बस सिर्फ इंसाफ मागते हो
कहीं तुम कर्ता,कहीं वक्ता हो
सुनो!तुम कड़ी तुम समाज हो
इसके रचियता व रचनाकार हो
संभलो तुम इसके अंगी कार भी
नीलम पांडेय नील

Author
Neelam Naveen
शिक्षा : पोस्ट ग्रेजूऐट अंग्रेजी साहित्य तथा सोसियल वर्क में । कृति: सांझा संकलन (काव्य रचनाएँ ),अखंड भारत पत्रिका (काव्य रचनाएँ एवं लेख ) तथा अन्य पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित । स्थान : अल्मोडा
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