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समसामयिक

अमरेश गौतम

अमरेश गौतम

मुक्तक

June 28, 2017

बगावत छेंड़ दी, बाग की लताओं नें,
माली कैद है, हमपर राज किसका है।
कारजा़र सा माहौल है, अपनों का अपनों से,
अपना सा ये काजि़ब, समाज किसका है।

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Author
अमरेश गौतम
कवि/पात्रोपाधि अभियन्ता
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