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समय

डा. सूर्यनारायण पाण्डेय

डा. सूर्यनारायण पाण्डेय

कविता

February 28, 2017

समय धन है,
और संसार का मूल्यवान भी
‘धन’ समय को नहीं खरीद सकता
पर ‘समय’-
धन का सृजन कर सकता है.
धन की नियति है
वह लौट सकता है
पर समय-
कहाँ लौट के आता ?
अस्तु,
समय रहते समय को पहचाने
इसे मान दें,
स्थान दें,
और अपने जीवन को
समय के साथ प्रवाहमय होने दें
यह समय है-
जो आपको बनाएगा
आपके प्रति पल के प्रयासों
और प्रयत्नों,
का लेखा
समय के पास है
और यही
आपको प्रतिष्ठित करेगा
शीर्ष पर
उसी अनुपात में
जिस अनुपात में
‘समय’ के साथ की है
साझेदारी.

Author
डा. सूर्यनारायण पाण्डेय
देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में 1000 से अधिक लेख, कहानियां, व्यंग्य, कविताएं आदि प्रकाशित। 'कर्फ्यू में शहर' काव्य संग्रह मित्र प्रकाशन, कोलकाता के सहयोग से प्रकाशित। सामान्य ज्ञान दिग्दर्शन, दिल्ली : सम्पूर्ण अध्ययन, वेस्ट बंगाल : एट ए ग्लांस जैसी... Read more
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