Sep 9, 2016 · मुक्तक
Reading time: 1 minute

समय

समय बदलते देर न लगती,
क्यों खोवे है आस ?
नव प्रभात फिर से आवेगा,
रख रे ऐसी आस ।
जब झेलेगा सिर पर अपने,
श्रम-घन की तू मार।
अवधूत तभी सुख का सूरज,
दे सकेगा उजास ।

31 Views
Copy link to share
avadhoot rathore
35 Posts · 1k Views
You may also like: