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समय बड़ा बलवान हुआ है

समय बड़ा बलवान हुआ है समय समय पर भारी।
समय रहा जी सबका राजा जिससे दुनिया हारी।।

पलक झपकते सुबह हुई है पलक झपकते शाम।
पलक झपकते जख्म मिले हैं पलक झपकते वाम।।
समय समय की बलिहारी है समय समय पर होता।
कभी कोई तो बहुत दुखी हो दिल से हर्षित होता।।
समय समय की ताकत ऐसी देखे दुनिया सारी।
समय बड़ा बलवान हुआ है समय समय पर भारी।

समय जो बदला हरिश्चन्द्र का चला गया धनधाम।
राजा मोरध्वज भी हारे समय रहा बलवान।।
समय जो बदला रामचन्द्र का जंगल जंगल भटके।
सिया चली गईं भाई गया जब प्रान अधर में अटके।।
समय समय के समय चक्र को न टाल सके नरनारी।
समय बड़ा बलवान हुआ है समय समय पर भारी।।

पर वही समय जो कृष्ण मित्र पर आकर ऐसा चमका।
तीन लोक की मिली सम्पदा समय का दामन दमका।
सुदामा जैसे दीन हीन का इक नया किरदार दिखा।
तीन लोक का मालिक अब तो समय का हकदार दिखा।।
रीते हुए इंसान को जिसने बना दिया हजारी।
समय बड़ा बलवान हुआ है समय समय पर भारी।।

कवि देवेन्द्र शर्मा “देव”

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