समय ने कहाँ // कविता

इंसान ने समय से पूछा,
कब ठहरोगे तुम ?
समय ने कहाँ !
मैं अनंत हूँ,
मैं परिवर्तनशील हूँ,
अतीत से कल की ओर
प्रवाहमान हूँ ?
समय ने इंसान से कहाँ
बंधु मेरे साथ चल
ना मेल होंगे दोबारा
मेरी रफ्तार से चल !
खामोशी से समय ने कहाँ
तू नहीं बड़ा इस संसार में
समय की प्रकृति समझ
तू इंतज़ार में
किसके लिए खड़ा है ?
हार के बैठा है
किस कारण से
तुम्हें मालूम हैं न
समय परिवर्तनशील, प्रवाहमान हैं ???

दुष्यंत कुमार पटेल”चित्रांश”

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नाम- दुष्यंत कुमार पटेल उपनाम- चित्रांश शिक्षा-बी.सी.ए. ,पी.जी.डी.सी.ए. एम.ए हिंदी साहित्य, आई.एम.एस.आई.डी-सी .एच.एन.ए Pursuing -... View full profile
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