समय की मांग

ब्रह्मांड में अनेक प्रकार से गतिविधियां हो रही हैं,ग्रहों आकाशगंगा, सौर पिंड,सौर्य मंडल,उपग्रहों का खोज शोध,खगोल शास्त्र अपने अनुसंधान में करता आ रहा है,दूसरे ग्रहों पर आज जीवन की खोज में लगे हैं,अभी तक पूर्ण प्रमाणित अनुसार सौरमंडल में पृथ्वी जिसे नीला ग्रह कहा जाता है,जहां सूर्य द्वारा संपूर्ण ऊर्जा प्राप्त होता है,जहां क्षोभ मंडल,समताप मंडल,वायु मंडल,ओजोन परत,पृथ्वी सतह पर अनेक सजीव निर्जीव अनेक पशु पक्षी जीव जंतु पर्यावरण में निवास स्थान बना कर रहते है,जिसमें सबसे बुद्धिमान जीव है मनुष्य,जो आज आधुनिक युग का जनक हो गया है,शास्त्र,पुराण,अनेक प्रमाण है,जिससे मनुष्य एक नई दिशा पर आगे बढ़ता ही चला है,शास्त्र पुराण,वैज्ञानिक ढंग यह कहते है,कि अपने परिधि में रह कर ही कुछ करें,जो भी कार्य निर्णय लें,अपने समयानुसार उठते हुए समयक मांग के अनुसार लिया जाता है

समय एक ऐसा बलवान चक्र है यंत्र है,जो जिसे चाहे उसे किसी भी प्रकार से उठा पटक कर आ सकता है,समय गति घटना का पूर्वानुमान लगा पाना किसी के भी बस में नहीं है,जैसे भूकंप का कोई पूर्वानुमान नहीं कर पाता है,उसी प्रकार समय गति का अंदाजा भर लगाया जा सकता है और आगे भी लगाया जाता रहेगा

समय मांग भी अजीबो गरीब किस्म सा होता है,बुजुर्गों का कहावत कभी गलत नहीं होता
धन को जो देखो पूरा जात
फट से लो तुम आधा बाट

यह कहावत भी मेरे आशा से भारत पाकिस्तान बंटवारा में जम्मू-कश्मीर बंटवारा हुआ होगा,जिससे वहां के राजा रतन सिंह ने दोनों सरकारों से कुछ समय मांगते हुए विलय के बारे में सोचने पर विचार-विमर्श करते 1947 का बंटवारा अंग्रेजों द्वारा भारत के दो टुकड़े हो गए,कुर्सी का लालच क्या से क्या करवा दें,मुस्लिम लीग पार्टी के अध्यक्ष मोहम्मद जीना और कांग्रेस के अध्यक्ष स्वर्गीय पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत के प्रधानमंत्री,दोनों देशों के सरकार के मध्य में फंसा जम्मू कश्मीर राज्य,1947 में पाकिस्तान को न संतोष हुआ हो,और राजा रतन सिंह के विचारों को समय तक प्रतीक्षा न कर पाना,जिससे जम्मू-कश्मीर में अपना कब्ज़ा स्थापित करने लगा हो,जिसे राजा रतन सिंह अपने प्रजा का हाल देखते हुए,अपने विचार अपने शर्त के साथ भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से मिलने और शर्तों को दर्शाते हुए जो शर्त 370 35a धारा है,इसके साथ वार्तालाप हुआ हो,जवाहरलाल अनुभवी व्यक्ति और भारत देश के प्रधानमंत्री होने के नाते अपने भारत माता के मुकुट जम्मू कश्मीर को खोना नहीं चाहते थे

राज्यसभा,लोकसभा में बिल पास कराना,मंत्रियों को सूचना भेजना,आज के आधुनिक युग के समान संभव नहीं था, न फोन,तार कितना भी जल्द भेजा जाता दो से तीन दिन तो अवश्य लग जाता,जवाहरलाल नेहरू अगर रतन सिंह के द्वारा शर्त n मानते तो,भारत का राज्य जम्मू कश्मीर आज के समय में शायद पाकिस्तान देश में विलय नजर आता,यह राज्य भारत के पास शायद ना होता,तब आज यही जनता 370 35A के लिए जवाहरलाल नेहरू को दोष देता है,यही जनता आज कश्मीर पाकिस्तान के हाथों में पूरा होता,तो भी जनता पंडित जवाहरलाल नेहरु को दोष देता,जवाहरलाल नेहरु जी ने तत्काल राष्ट्रपति स्वर्गीय राजेन्द्र प्रसाद के से अस्थाई कानून 370,35A जम्मू कश्मीर राज्य में लागू हो,तत्कालीन प्रभाव से पारित कराया,और जम्मू कश्मीर को भारत में तत्काल मिला लिया गया,राजा रतन सिंह जी के द्वारा शर्तो और उनके मर्जी से भारत का अभिन्न अंग कहा जाने लगा,जो आगे चलकर भारत के माथे पर कलंक का टीका भी कहा जाने लगा

लेकिन जिसे तत्कालीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,गृह मंत्री अमित शाह ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर और लद्दाख को केंद्र प्रशासित राज्य घोषित करते हुए,370 35A का कलंक का टीका खत्म किया,1947 के समय का मांग और 2019 के समय के मांग जैसा न था,लेकिन दोनों एक ही था,जो उस समय मांग थी,और इस समय की मांग को पूर्ण किया जाता है,कोई गलत या सही नहीं होता,समय उसे उस तरह देखने पर मजबूर करता है,हर मनुष्य अपने अपने नजरिए से समय के चक्र को परखने में अपना अनुमान प्रस्तुत करता है,कहा गया है,जिसकी लाठी उसकी भैंस

जिस मिट्टी का तिलक लगाएं
उसकी दिव्य झलक दिख लाएं
भारत के हम वीर सपूत
जननी के समक्ष दूत कहाएं

समय का मांग जीवन आधार से जुड़ा होता है,व्यक्ति सम्यक मांग के अनुरूप चलना पड़ता है,समय कभी कभी व्यक्ति को झूमने पर उत्साहित करता है,तो कभी उसी व्यक्ति को रोने पर मजबूर करता है,व्यक्ति लक्ष्य प्राप्ति के लिए संघर्ष पथ का चयन करता है,मंजिल तक पहुंचना चाहता है,संघर्ष पथ पर उसके समक्ष अनेक मांग आकर खड़ी हो जाती हैं

कभी कभी जीवन में ऐसी घटनाएं,जो तूफानी हवाओं के समान आता है,संपूर्ण जीवन तहस-नहस कर देता हैं,ऐसे में क्या व्यक्ति अपने दायित्वों से मुंह मोड़ लेना कहां समय के मांग के अनुरूप हो सकता है,लेकिन ऐसा ही तूफान पेड़ के नीचे खड़े व्यक्ति के ऊपर आता है,तो वहां से भाग खड़ा होता है,परंतु पेड़ से लगी टहनियां अपने पेड़ का साथ छोड़ने को तैयार नहीं होते है, अपना बलिदान देकर के,इस तूफान में अपने पेड़ को सुरक्षित रखते हैं

मनुष्य संकट समय में मांग धैर्य के साथ सम्यक मांग अनुसार अपने लक्ष्य संधान,मंजिल के तरफ अग्रसर होने को सदैव लालाईत रहना चाहिए,धूप के बाद छांव आता है,रात के बाद दिन का शुरुआत होता है,बस व्यक्ति को इंतजार करना चाहिए,तत्पर रहना चाहिए,मंजिल तो समय के साथ अवश्य ही प्राप्त होगा,इसमें संदेह करना अपने आप पर विश्वास ना होना है,जो समय का मांग आपूर्ति नहीं करेगा,जो आगे अपने जीवन को अंधकारमय समय के खाई में जाने को अग्रसर होगा,जीवन नदी में अनेक भवर ऐसे आएंगे,कि जब व्यक्ति स्वयं को अंतिम समय पर जाने की ओर देखता है,हार कर बैठ जाता है

यह सम्यक मांग नहीं,तुम हार मान कर इस भवर में विफल होकर पश्चाताप करो, सम्यक मांग है,उठो संघर्ष करो,संघर्ष करने पर मंजिल प्राप्त न हो तो,तो व्यक्ति कितना निराश होता है,आज के युग में बेरोजगारी अपने चरम सीमा पर है,व्यक्ति को उसके योग्यता अनुसार कार्य नहीं मिलता है,, अगर कहीं मिल भी जाए,तो उस व्यक्ति का शोषण सुनिश्चित होता है, चापलूसी,चाटुकारिता तो प्रा.लि. कम्पनियों में एक सूत्र बन गया है,जो आज ईमानदार,कर्तव्यनिष्ठ,स्वाभिमान से जीने वालों के लिए नौकरी ही नहीं है,चापलूसी चाटुकारिता के सूत्र पर आज के समय में प्राइवेट नौकरी के आसार बन गए हैं,राजनेता अपना घर भरने में जुटे हैं,तो मजदूर के आधे मजदूरी अमीर के घर की रखवाली खाने घूमने में होता है,यह सम्यक मांग,अब व्यक्ति को अपने योग्यता दर किनार करते हुए,अपने पेट के लिए,अपनी योग्यता से निचले श्रेणी में कार्य करने पर व्यक्ति मजबूर होता नजर आ रहा है

शिक्षा का उद्योग शास्त्रों का उद्योग व्यक्ति को रोजगार विहीन बना दे रहा है,शिक्षा का अधिकार सबको है,लेकिन अयोग्य छात्रों को नकल करा कर इंजीनियर,सुरक्षा अधिकारी,अध्यापक,लेखपाल,छोटे पोस्टों पर चयनित किया जाता है, तो क्या यह सम्यक मांग है,कि अवहेलना,कि अपना अपना देख ना है,एक दिन ऐसा आएगा,कि संपूर्ण सृष्टि में मानवता विहीन नजर आएगा,जिस प्रकार खिलवाड़ किया जा रहा है,जिससे मानव समाज प्रति द्वेषता,जीवन में हमेशा चेतावनी दे रही है,कि सम्यक मांग को समझो,जीवन के साथ मौत में चोली मत खेलो,जिसका खामियाजा तुम्हारा आने वाली पीढ़ी,पीड़ा भोगे तुम्हारा अस्तित्व सम्यक मांग के पहाड़ के कहर में दम तोड़ दे

व्यक्ति जिस दैविक आपदा,संक्रमण संचालित रोग,पर्यावरण अपने अधिकार की मांग के लिए संपूर्ण ब्रह्मांड में,मानव से पर्यावरण अधिकार के लिए,मानवी अधिकार सहारा ले रहा है,अपने अधिकार के लिए बगावत कर बैठता है,धर्म-निरपेक्ष लेकिन अपने अधिकार का दुरुपयोग समय के विरुद्ध,अपने जीवन के उपयोग करना स्वयं विनाश बिना समय के हाथ,समय से पहले सुनिश्चित है,युगो युगो से सम्यक मांग,परिवर्तन को कोई बदल नहीं पाया है,राजा दशरथ के पुत्र श्री राम को वनवास जाने के लिए छोटी रानी राजा से अपने वचन पूर्ति हेतु सम्यक मांग करता है,जो भरत से भी ज्यादा प्रेम स्नेह करती थी,उन्हें चौदह वर्ष जाने का वचन ले लिया,लेकिन समय का मांग की अवहेलना चौदह भुवन के स्वामी त्रिलोकीनाथ राजस्व श्री राम जी ने नहीं किया,चौदह वर्ष काटने के बाद वही श्री राम अयोध्या के अनुसार व्यक्ति सुखी स्वपोषी स्वावलंबी पथ पर चलते हुए,मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम कहलाएं

साहस से व्यक्ति मंजिल प्राप्त करने वाला बनता है,मंजिल का दवा है मित्र है,जो सभी का पहचान भी कराता है,कौन किसका मित्र है कौन पराया अपना है,सम्यंक मांग जीवन दर्पण जीवन सा संपूर्ण अस्तित्व को दर्शाता है,कहने में संकोच तक नहीं है,सम्यक मांग,भक्त को जीवन प्रदर्शन का आईना है,समय मांग के अनुदिश,चलना जीवन परीक्षा सफलता मंजिल का विजेता नजर कभी नजर नहीं आता है,सम्यक मान ज्ञान के पाठशाला गुरु मंत्र का अध्यापक है,जो व्यक्ति को जीवन दर्पण का महत्व बताता है…!
धन्यवाद
राइटर:- इंजी.नवनीत पाण्डेय सेवटा(चंकी)

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नाम:- इंजी०नवनीत पाण्डेय (चंकी) पिता :- श्री रमेश पाण्डेय, माता जी:- श्रीमती हेमलता पाण्डेय शिक्षा:-...
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