गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

समय की चाल को

* गीतिका *
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पहचान लेना है समय की चाल को।
फैले हुए उलझन भरे जंजाल को।

धोखा कभी हो भी गया तो ग़म न कर।
जो बच गया दो अहमियत संभाल को।

नाकामियों की अब न हो चर्चा कहीं।
कर लो मुहब्बत भूल बीते हाल को।

बेख़ौफ़ हो आकाश में उड़ते रहें।
रखना परिंदों हित बचा हर डाल को।

हर हाल सह लेना समय की मुश्किलें।
झुकने न देना तुम कभी निज भाल को।
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-सुरेन्द्रपाल वैद्य, ०४/०३/२०२१

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नाम : सुरेन्द्रपाल वैद्य पिता का नाम : श्री इन्द्रसिंह वैद्य शिक्षा : कला स्नातक पता : मकान न•- 45, हिमुडा आवास बस्ती भियुली, मण्डी, जिला मण्डी (हि•प्र•) - 175001…
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