कविता · Reading time: 1 minute

समय का चक्र

समय की हथेली पर
घूमता है समय का चक्र
बारम्बार रचता है
खुद को नए सिरे से
समय नया होता है हर बार
नया करता है जीवन को
गति है तो समय है,
इसका मोल और महत्व है
कल को नापना,,नाथना,
और थामना नामुमकिन है
इसे व्यवस्तिथ करने की ,
कोशिस जरूर होती है
जीवन समय बद्ध है
और इसकी पूणर्ता भी
जीवन का अर्थ आत्म,,,सम्बाद
कहानी जिंदगी का प्रेमरोग
आखर अनन्त
एक खिड़की हजार दरवाजे
आनन्दम ।अपना पैसा
आशीर्वाद।क्या स्वाद है जिंदगी का।

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