कविता · Reading time: 1 minute

समयांतर

समयांतर
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कल तक राम को
काल्पनिक बताने वालों के
सुर कैसे बदल गये हैं,
उनकी कल्पनाओं के राम
धरातल पे आ गये हैं।
जन के राम हैं
समझाने लगें हैं।
मेरे श्रीराम के
अब वे भी
गुण गाने लगे हैं ,
जय श्री राम जय श्री राम
देखो!चिल्लाने लगे हैं।
🖋सुधीर श्रीवास्तव

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