.
Skip to content

समझौता

ईश्वर दयाल गोस्वामी

ईश्वर दयाल गोस्वामी

कविता

November 21, 2016

लड़की,
बीड़ी की
टोकरी लिए
जाती है,
कारख़ाने
रोज़-ब-रोज़ ।
ठेकेदार
घूरता है उसे
श्वान की तरह,
ताकता है,
उसकी देहयष्टि ।
जैसे कि-
लड़की बीड़ी है,
या बीड़ी ही
लड़की है ,
रोज़-ब-रोज़ ।
फिर भी
लड़की बीड़ी
बनाती है,और
टोकरी लिए
जाती है कारख़ाने
रोज़-ब-रोज़ ।
तेंदूपत्ते की गिड्डी
उसके लिए है
जैसे-काग़जों
की रीम ।
जिसमें पढ़ती है
लड़की ग़रीबी
का पाठ और
सीखती है हिसाब
दुनियाँदारी का ,
ठेकेदार की
आँखों में छलकती
वासना ,
गलियों से ग़ुजरते
मनचलों के
अश्लील ताने और
कई बार
फ़ाका-मस्ती झेलकर
वक्त से पहले ही
सयानी हो चली
है, अब लड़की ।
लड़की,जिसके
हाथ में थमना था
स्कूल का बस्ता ,
जिसके गीत से
गूँजना थीं
घर की दीवारें ।
उसे भूख ने
थमा दिए तेंदूपत्ते,
जरदा और टोकरी।
छोकरी फिर भी
प्रसन्न है,क्योंकि-
उसके भाई तो
जाते हैं स्कूल ।
वे पढ़ेंगे ,
अफ़सर बनेंगे
और करायेंगे
उसका व्याह
किसी अम़ीर के साथ ।
इस आशा से
लड़की बीड़ी
बनाती है और
टोकरी लिए
जाती है कारख़ाने
रोज़-ब-रोज़ ।
बाबा उसे
पढ़ा नहीं सकते,
लड़की
पराया धन है
उनकी नज़र में ।
माई उसे खिला
नहीं सकती क्योंकि-
लड़कों को
कम पड़ जाएगा
रोज़ का भोजन ,
फिर भी
उसकी कमाई में
सभी का
हिस्सा है ,
बाबा का ,
माई का और
भाई का ।
इसलिए लड़की
बीड़ी बनाती है
और टोकरी लिए
जाती है कारख़ाने
रोज़-ब-रोज़ ।
मनचलों की
सीटियाँ सुनते हुए ।
बुनते हुए सपने
सुंदर भविष्य के ।

Author
ईश्वर दयाल गोस्वामी
-ईश्वर दयाल गोस्वामी कवि एवं शिक्षक , भागवत कथा वाचक जन्म-तिथि - 05 - 02 - 1971 जन्म-स्थान - रहली स्थायी पता- ग्राम पोस्ट-छिरारी,तहसील-. रहली जिला-सागर (मध्य-प्रदेश) पिन-कोड- 470-227 मोवा.नंबर-08463884927 हिन्दीबुंदेली मे गत 25वर्ष से काव्य रचना । कविताएँ समाचार... Read more
Recommended Posts
गीत
अंधेरी-सी रात में एक खिड़की डगमगाती है, सच बताऊँ यारों तो, एक लड़की मुझे सताती है। भोली भाली सूरत उसकी मखमली-सी पलकें है, हल्की इस... Read more
नहीं चैन में कोई, छोड़ दो कक्का बीड़ी /सूरज नाम परंतु, पी रहे बुद्धू-बीड़ी
बीड़ी औ सिगरेट पी, पत्नी को दें ज्ञान| कहें नहीं दिखला मुझे, मद की ऊँची तान|| मद की उँची की तान,दिखाती खाकर मेरा| नाती से... Read more
ज़िन्दगी को छोड़कर जाता रहा...
ज़िन्दगी को छोड़कर जाता रहा... =================== रोज़ ही बाज़ार वो जाता रहा। रोज़ खाली हाथ क्यूं आता रहा।। ज़िन्दगी भर मुफलिसी का साथ था, भूख... Read more
बेटियाँ
बेटा बेटा करते करते आज तीसरी बेटी हुई है उम्मीदों की बली आँचल फिर चढ़ी है दुर्गा माँ की डोली धूम धाम से सजी है... Read more