May 3, 2017 · कविता
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सरहद के वीर शहीदों को मेरा शत-शत नमन

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सरहद के वीर शहीदों को,मेरा शत-शत नमन।
खुद को मिटाकर जो,कर गये सुरक्षित वतन।
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खबरदार ऐ सरहद पार,कश्मीर है हमारा चमन।
ललकार हमें मत ऐ कायर,अब नहीं होता सहन।
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देख बर्बरता दुष्टों की,लहक रही सीने में अगन।
फिर खून से रंग डाला,स्वर्ग सम अपना गुलशन।
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धैर्य,शान्ति,बहुत हुआ,अब करो पापी का दहन।
दो शीश के बदले,काट कर आओ सहस्र गर्दन।
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सूनी हुई मांग,उतर गई सुहागन की कंगन।
बिलख-बिलख कर रो रही बेटी,माँ और बहन।
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टूटी पिता की लाठी,रास्ता ताके माँ की प्यासे नयन।
बिटिया आस में बैठी,सुना हो गया उसका जीवन।
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छप्पन इंच की छाती,सिंह सी बलशाली बदन।
नरेन्द्र भरोसा मत तोड़ो,निभाओ अपना वचन।
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सुख नींद सब सो रहे,सरहद पर सैनिक होते हवन।
नित खून से लाल हो,सन रहा केशर घाटी का गगन।
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सरहद के वीर शहीदों को,मेरा शत-शत नमन।
मिटा कर खुद को,जो कर गये सुरक्षित वतन।
????—लक्ष्मी सिंह ??

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लक्ष्मी सिंह
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MA B Ed (sanskrit) My published book is 'ehsason ka samundar' from 24by7 and is... View full profile
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