सब ठीक तो है न?

खिलखिलाते हंसी वाले चेहरे पर ये शिकन क्यों है?
एक आजाद परिंदे के अंदर ये घुटन क्यों है?
क्यों बैठे हो गुमसुम सी अंधेरे में?
सब ठीक तो है न…..?
किसी ने कुछ कहा क्या या कुछ और ही बात है?
तेरे आंखो में क्यों ये अश्कों की बरसात है?
या कुछ टूट गया है सीने में?
सब ठीक तो है न…..?
तेरे चहकते अधरो पर बेबसी के छीटें फैले क्यों हैं?
फुदकते बचपन के फूल मुरझाए से क्यों हैं?
ये खामोशी क्यों बदल गई डर में?
सब ठीक तो है न…..?

…..राणा…..

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