बाल कविता · Reading time: 1 minute

सब की प्यारी कोयल हमारी

दिनांक 10/6/19

रूप रंग पर जाओ मत
मधुर वाणी है सब से मुख्य
कोयल की बोली से
मन हो उठे मयूर

कोयल के सब दीवाने
होती जब की वह कारी
बगिया में चहके जब वो
टूटे लोगों का ध्यान मगन

घुमे अमराई जब कोयल
कुहू कुहू से गूंजे बगिया
कृष्ण की बाजी बासुरिया
राधा डोले संग सखिया

सीख देती है सबक कोयल
काले गोरे का न भेद करो
सब है उस दाता के बच्चे
रहो मानव बन कर सच्चे

स्वलिखित
लेखक संतोष श्रीवास्तव भोपाल

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