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सब का अपना ताना बाना है

Awneesh kumar

Awneesh kumar

कविता

March 8, 2017

सब का अपना ताना बाना है,
सब का अपना ठउर ठिकाना है,
सब के अपने साथी अपना मजमा है,
सब का अपना ख़ाब अपना सपना है।
(अवनीश कुमार)
अच्छे बुरे की पहचान कहा है,
दिल तो है पर दिमाग कहा है,
कस्ती कब तक नदी किनारे रहती,
जानते सब है ,अंजान कहा है। (अवनीश कुमार)

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Author
Awneesh kumar
नमस्कार अवनीश कुमार www.awneeshkumar.ga www.facebook.com/awneesh kumar

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