मुक्तक · Reading time: 1 minute

सब्बे सत्ता सुखी रहे

ज्योति पर्व सा मन उज्जवल हो, और मिटे तम काला,,
अत्त दीपो भव मंत्र सफ़ल हो, मन मंदिर में रहे उजाला,,
मिटे अंधेरा पथ उज्जवल हो, सब्बे सत्ता सुखी रहे,,
खुद दीपक बन जलें दीप सा.. है संदेश निराला,,

एस. कुमार मौर्य
बहराइच, उ. प्र.

1 Like · 42 Views
Like
You may also like:
Loading...