सबसे बडा भूत

जब मै छोटा बच्चा था
दादी माँ ने सुनाया जो मुझे
वो भूतो का किस्सा था
मै दिल का कच्चा था
भूतो से डरना तब
मेरे जीवन का इक हिस्सा था
धीरे-धीरे बडा हुआ मै
लगी पता मुझे वास्तविकता
नही है कोई भूतो का अता-पता
भूतो का वो किस्सा केवल किस्सा था
आज के वैंज्ञानिक युग मे
उनका न कोई हिस्सा था
पहली बार मेने जब अखबार खोला था
उसमे छपा किसी हत्या का डिंडोरा था
दूसरे दिन खोला तो
उसमे थी खबर की
बेचारी अबला पर किसी ने
कर दिया तेजाबी हमला था
तीसरे दिन अखबार खोला तो
आतंकवाद का बोलबाला था
रोज-रोज देखकर यह सब
समझ मुझे ये आया था
की भूतो का नाम तो
किसी इंसान ने खराब किया था
क्योकि धरती पर इंसान से बडे भूत ने
जन्म ही नही लिया था।
कृष्ण सैनी

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