सफलता कभी अंतिम नहीं होती

जीवन के संघर्ष का मुस्कान से
उत्तीर्ण करो हर कठिन इम्तिहान

ध्वस्त करो पथ में जो आये
चाहे जितना भी विकट व्यवधान

समय से स्वयं ही लड़कर तुम
जहाँ में निर्मित करो अपनी पहचान

सफर इतना हसीन हो की
मन में ना उपजे कभी भी थकान

अपने साहस से स्थापित करो
पटल पर नये से नया कीर्तिमान

जिस रास्ते से गुजरो तुम
छोड़ अपने पद चिन्हों के निशान

बुलंदी पर हो तुम्हारा सितारा
और तुम्हें मिल जाये सारा आसमान

जीवन में जीत का चलता रहे
नित निरंतर अथक अविराम अभियान

तुम से ईश्वर भी बाध्य हो कर
देने को विवश हो दिव्य अमोघ वरदान

आपके कार्यों से समाज को मिले
हमेशा ही एक सार्थक योग्य योगदान

अपने हाथों से हाथों की लकीरों के
आप ही बने भाग्य के करुणानिधान

परीक्षा की अग्नि ही देगी
मानव जन में सुशोभित सम्मान

अंकसूची निर्धारित नहीं करती कभी
आपके विराट कौशल का उपयुक्त स्थान

यह सफलता अंतिम नहीं है
अभी तो सफलताओं का चाहिए हमें उड़ान

मानव के सद्कर्मों से होता है
हर्ष में आनंदित स्वयं निराकार भगवान

ये “आदित्य” करता है आपसे
पूर्ण विनम्रता से केवल यही आह्वान

पूर्णतः मौलिक स्वरचित सृजन
आदित्य कुमार भारती
टेंगनमाड़ा,बिलासपुर, छ.ग.

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