" सपन घड़े हैं " !!

गीत

भेंट हाथ में ,
लिये खड़े हैं !!

दूर कहीं है ,
सधा निशाना !
भेद अभी है ,
हमने जाना !
ऐसे डूबे ,
खुद को भूले ,
या फिर है यह ,
ऐक बहाना !
फेरो नज़रें ,
प्रश्न बड़े हैं !!

रंग निराले ,
रोज़ यहाँ हैं !
आकर्षण है ,
बोध यहाँ है !
भीड़ भाड़ ना ,
रेलम पेला ,
नई नई नित ,
खोज यहाँ है !
हमने तुमने ,
सपन घड़े हैं !!

जब जग जाये ,
विश्वास अनूठा !
खिल जाये है ,
बूटा बूटा !
भेंट चढ़ा है ,
समय अगर तो ,
खुशियों को है ,
हमने लूटा !
मिले नज़र बस ,
यहीं अड़े हैं !!

स्वरचित / रचियता :
बृज व्यास
शाजापुर ( मध्यप्रदेश )

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like 1 Comment 0
Views 6

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share