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सपनो से बहुत गुफ़्तगू रहती है मेरी

सपनो से बहुत गुफ़्तगू रहती है मेरी
कभी खुली कभी बंद आँखों में पलते हैं
कभी फिसल जाते हैं रेत की तरह हाथ से
कभी हक़ीक़त की तरह साथ में चलते हैं

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Yashvardhan Goel
30 Posts · 814 Views
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