Skip to content

सपनो से बहुत गुफ़्तगू रहती है मेरी

Yashvardhan Goel

Yashvardhan Goel

गज़ल/गीतिका

September 9, 2016

सपनो से बहुत गुफ़्तगू रहती है मेरी
कभी खुली कभी बंद आँखों में पलते हैं
कभी फिसल जाते हैं रेत की तरह हाथ से
कभी हक़ीक़त की तरह साथ में चलते हैं

Share this:
Author
Recommended for you