सपने

ओ रे सपने!
तुझे भूले नहीं है हम
बस फंस गए थे हालातों में..

हो सकती है कुछ देर
आने ना देंगे पर अंधेर
कुछ गहरी सी लगी है चोट
जो खेल हुआ जज्बातो से..

हार नहीं मानी है
तुझे पाने की ठानी है
अंतिम साँसे भी न्यौंछावर
चाहे लड़ना हो तूफानों से..

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निरन्तर सीखना मेरा उद्देश्य सेवा भाव हृदय में है करू मैं देश की पूजा बस...
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