दोहे · Reading time: 1 minute

सपने नव वर्ष के

सपने फिर-फिर सज गए , फिर मन हुआ तुरंग ।
बीते ऐसे दिन कई , न बदला मन का ढंग ।।

हृदय – हृदय हुलास हो , अधर – अधर हो हास ।
मन में सकल भरा रहे , अटल अमल विश्वास ।।

साल कई आए गए , भांति – भांति संकल्प ।
मन – मयूर चंचल बड़ा , ढूंढे सुखी विकल्प ।।

हो पूरन मन कामना , सभी करें उत्कर्ष ।
सबको यह शुभकामना , शुभ-शुभ हो नव वर्ष ।।

अशोक सोनी
भिलाई ।

2 Comments · 46 Views
Like
Author
135 Posts · 7.8k Views
पढ़ने-लिखने में रुचि है स्तरीय पढ़ना और लिखना अच्छा लगता है साहित्य सृजन हमारे अंतर्मन को उद्घाटित करने वाला एक सशक्त माध्यम है ।
You may also like:
Loading...