मुक्तक · Reading time: 1 minute

सपना

खुली आंख से फिर एक सपना देखा है मैंने
उसको दूर कहीं तड़पते हुए देखा है मैंने
इस भयानक शोर में चीख उसकी दब गई होगी
जिंदगी बक्श दो पुकारते हुए देखा है मैंने

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