गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

सपना म्ह बी टोहै ना पावैं थमनै ये स्कूल सरकारी (हरियाणवी)

सपना म्ह बी टोहै ना पावैं थमनै ये स्कूल सरकारी,
इनकी जो या हालत होरी स सब कमी स र म्हारी।

कई यूनियन बन री पर आपस म्ह तालमेल कोणी,
साची कहूँ यूनियनां म्ह कोय बी मास्टर ठेल कोणी।

असलियत स या बिना नींम के महल बनाना चाहवैं,
सरकारी स्कूलां नै दोनों ऐ हरगज ना चलाना चाहवैं।

सरकारी स्कूल आज राजनीति का अखाड़ा बन गए,
मास्टर अर सुविधा कोणी फेर बी बन नंबर वन गए।

एक शिक्षा ना मिलती बाकी सारी चीज मिलैं आड़े,
खुद आपणी जड़ काटैं बिघन के बीज मिलैं आड़े।

जो करैं लग्न तै काम इसै मास्टर बहोत कम पावैंगे,
इबै सोवैं सँ बेफिक्री म्ह पाछै सारै बहोत पछतावैंगे।

नेता अर बड़े अधिकारी मिलकै चाल चालैं कसूती,
बालक आवैं कोणी स्कूलां म्ह ये घेरी घालैं कसूती।

वो दिन दूर नहीं जब सरकारी स्कूल बंद हो ज्यांगे,
सुलक्षणा न्यू ऐ लिखे जाइये पास तेरे छंद हो ज्यांगे।

©® डॉ सुलक्षणा अहलावत

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