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सन्दीप की त्रिवेणियाँ

सन्दीप कुमार 'भारतीय'

सन्दीप कुमार 'भारतीय'

कविता

July 28, 2016

सन्दीप की त्रिवेणियाँ
*****************

(१)
सबका था अनमोल हुआ करता था कभी
चन्द सिक्कों में गली नुक्कड़ पर बिकता है

ये ज़मीर है साहब बड़ी मुश्किल से मिलता है |

(२)

यहाँ पे बमुश्किल कोई ईमानदार मिलता है
हर तरफ बेईमानों का ही सिक्का चलता है

ईमान तो झोंपड़ियों में घुट घुट के मरता है |

(३)

यहाँ चापलूसों के हाथों में चांदी चम्मच है
कर्मशील दो वक़्त की रोटी को तरसता है

साहब कर्मठ को बस तिरस्कार मिलता है |

(४)

अधिकारी यूँ ही वक़्त बेवक्त तफ़रीह करता फिरता है
फाइलों का ढेर मातहत की मेज पर ही आकर लगता है

चपरासी का बच्चा इतवार को भी छुट्टी का इन्तजार करता है |

“सन्दीप कुमार”

Author
सन्दीप कुमार 'भारतीय'
3 साझा पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं | दो हाइकू पुस्तक है "साझा नभ का कोना" तथा "साझा संग्रह - शत हाइकुकार - साल शताब्दी" तीसरी पुस्तक तांका सदोका आधारित है "कलरव" | समय समय पर पत्रिकाओं में रचनायें प्रकाशित होती... Read more
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