कविता · Reading time: 1 minute

सन्डे ( रविवार )

शर्दी की सुबह है, जल्दी ना उठा करो ।
रजाई गर्म करो, रजाई का मज़ा लिया करो ।।

राम राम श्याम श्याम, होती रहेगी वैचेन ना हुआ करो ।
बड़ी दूर से आता है संडे, सन्डे का भरपूर मजा लिया करो ।।

चाय रखो सिराहने, और हाथों को चूम लिया करो ।
शर्दी का मौसम है, उनके हाथों को भी गर्म कर दिया करो ।।

साँसों की भाप, को साँसों में मिला दिया करो ।
ज़िस्म को अलाव बना, उनकी शर्दी भगा दीया करो ।।

मोबाइलों और बेशऊर मेसेजों को बिस्तर से दूर रखा करो।
सन्डे को यार दोस्तों और ऑफिस से दूर रहा करो ।।

सोने दो इन मासूम ख़्वाबों को,इनको ना जल्दी उठाया करो
सन्डे है, आज इस जाल में मोहब्बत को कैद ना किया करो।।

घर, दौलत , सौहारत को आज तौबा किया करो ।
आज सन्डे है, एक दूसरे में खोने पाने की हसरत रखा करो।।

गुफ़्तगू के लिए फ़ुरसत बड़ी सिद्दत से मिलती है।
सप्ताह का एक दिन, यादगार बना दिया करो ।।

शर्दी है , चलो अलाव जलाते हैं
बुझादो दियो को मोहब्बत का चराग़ जलाते हैं।।

बन्द कर दो इन खिड़की और रोशनदानों को
सूरज से कह दो, संडे को थोड़ा सुस्ता लिया करो ।।

आ जाओ पास बैठ जाओ , मेरे करीब से
सन्डे का मज़ा आराम से लेने दो ।।

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