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सदा मुझको रखना माँ ! अपने चरण में

तुम्ही हो, तुम्हीं हो, यह जीवन तुम्हारा,
तुम्हीं इसका कारण, अकारण तुम्हीं हो,
तुम्हीं हर ख़ुशी हो नयन के निलय में,
सदा मुझको रखना माँ ! अपने चरण में |

मैं जीवन सफर में अकेला था आया,
अजनबी जग से तूने माँ ! परिचय कराया,
लगाया था तूने माँ ! छाती से मुझको,
निर्भय किया दूध अपना पिलाया |
तुम्हारी हँसी थी माँ ! मेरी हँसी में,
सदा मुझको रखना माँ ! अपने चरण में |

मैं रोया तूँ रोई बहुत माँ ! रुलाया,
हाथों के झूले में मुझको झुलाया,
लोरी सुनाकर माँ ! मुझको सुलाती,
खुद जागती करती आँचल की छाया |
ध्वनित मातु ! वाणी तुम्हारी गगन में,
सदा मुझको रखना माँ ! अपने चरण में |

किये नन्हें पद से माँ ! आघात मैंने,
हर आघात को वक्ष पर तुमने झेला,
मैं मल-मूत्र में था सना, किन्तु तुमने,
किया साफ, छोड़ा कभी न अकेला |
निश्वार्थ माँ ! प्यार बहता हृदय में,
सदा मुझको रखना माँ ! अपने चरण में |

बड़े हो गए पर जरुरत माँ ! तेरी,
जीवन समर में माँ ! शक्ति हो मेरी,
तुम्हीं साँस में संचरित प्राण सी हो,
निराशा-तिमिर बीच दिनमान सी हो |
अहंकार का भाव डूबे विनय में,
सदा मुझको रखना माँ ! अपने चरण में |

– हरिकिशन मूंधड़ा
कूचबिहार

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Harikishan Mundhra
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