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सदा ज्ञान जल तैर रूप माया का जाया

जाया करवा-चौथ व्रत, रख देती उपदेश|
फिक्र कि अगले जनम में ,पुनि फँस गया बृजेश||
पुनि फँस गया बृजेश, पुनः जयमाला आयी|
हाय ! हमारे अग्र, बुड्ढिया ताल बजाई ||
कह “नायक” कविराय, मुक्त बन, तज जग-साया||
सदा ज्ञान-जल तैर, रूप माया का जाया||

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

जाया=पत्नी

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Pt Brajesh Kumar Nayak
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