सत्य" नहीं "अर्धसत्य"

ये “सत्य” नहीं “अर्धसत्य” है…

बरसों से “कलम” भी बिकती है
“कलमकार” भी बिकता है…
तभी तो सरेबाज़ार
“विद्या की किताबें” बिकती हैं
सुबह-सुबह “अखबार” बिकता है…

दुनिया ज़रूर पलट कर पूछती
“पत्रकारों” का हाल
पर सच तो ये है…
कोठे की मुन्नीबाई की तरह
अब पत्रकार बिकता है…

Suneel Pushkarna

Like Comment 0
Views 62

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share