गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

सताए मुझको

सताये मुझको आज वो मुलाकात
हुई थी तुमसे पहली मुलाकात

खड़े थे तरूवरू तले बारिश में
खड़कतीं बिजली जैसी मुलाकात

डरा सा तू और डरी सी मैं
हमेशा तड़पाये ये मुलाकात

मुझे याद नहीं कब आ गये पास
हसीँ प्यार भरी सी थी मुलाकात

न भूली अब तक उस नजदीकी को
बसी स्मृति में वो खास मुलाकात

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