कविता · Reading time: 1 minute

सतर्कता

गवाह है
इतिहास
पार की
जब जब
लक्ष्मण रेखा
परेशानी में
पड़ा मानव

हैं
प्राकृति
की भी हदें
स्वच्छ हो
पर्यावरण
दूर हो
प्रदूषण

रखें दूरी
आपस में
पर जुड़े रहें
मन से

जीने दें
जीव जन्तुओं
को स्वतंत्र
न करें
अत्याचार

है आज
कठिन परीक्षा
विश्व जूझ रहा
कोरोना से
लकीरें खींची है
घर घर में

कोरोना को
हराना है
घर में ही
रहना है
है अपने
घरों की
लक्ष्मण रेखा
पार नहीं
करना है

मिले जब
सूचना
संकट टलने की
तभी
घरों से बाहर
निकलना है

स्वलिखित
लेखक संतोष श्रीवास्तव

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