कविता · Reading time: 1 minute

सतगुरु नानक जग ते आया

सतगुरु नानक जग ते आया
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सतगुरु नानक जग ते आया
सारे संसार नूँ सी तारन आया

नानकशाह दी है लीला न्यारी
लगदी है सोहणी सूरत प्यारी
चानण कर हनेरा दूर भगाया
सारे संसार नूँ सी तारन आया

निर्गुण भक्ति धारा दे प्रवाहक
एक ही ईश्वरी भक्ति संवाहक
ऊँच नीच दा सी भेद मिटाया
सारे संसार नूँ सी तारन आया

दीन हीन दा सी बणया सहारा
जात पात दा करया किनारा
दुखियां दा बेड़ा पार लंघाया
सारे संसार नूँ सी तारन आया

मूर्तिपूजा दा कर दिता खंडन
ईश्वर उपासना मार्ग आबंटन
सबनां नूँ सतगुरु रस्ते लाया
सारे संसार नूँ सी तारन आया

बहते नीर ही सी मृदुल भाषा
मनसीरत पूरी हो अभिलाषा
इन्सानियत दा पाठ पढ़ाया
सारे संसार नूँ सी तारन आया

सतगुरु नानक जग ते आया
सारे संसार नूँ सी तारन आया
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सुखविंद्र सिंह मनसीरत
खेड़ी राओ वाली (कैथल)

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सुखविंद्र सिंह मनसीरत कार्यरत ःःअंग्रेजी प्रवक्ता, हरियाणा शिक्षा विभाग शैक्षिक योग्यता ःःःःM.A.English,B.Ed व्यवसाय ःःअध्ययन अध्यापन अध्यापक शौक ःःकविता लिखना,पढना भाषा ःःहिंदी अंग्रेजी पंजाबी हिन्दी साहित्यपीडिया साईट पर प्रथम रहना प्रतिलिपि…
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