Jun 8, 2020 · मुक्तक
Reading time: 1 minute

सच बयानी,

हर हाथ मेरे लिए ही उठे ये आसान नहीं,
क़लन्दर हूँ कद का कोई अरमान नहीं,
मरने पे आ जाऊं तो दिल बेखौफ मरे,
जमीं जज्बात की है कोई आसमान नहीं,

1 Like · 2 Comments · 24 Views
Copy link to share
अखिलेश 'अखिल'
60 Posts · 1.6k Views
Follow 6 Followers
"लिखता नहीं लिख के मिटाता हूँ, कह न सका जो गीत वही गाता हूँ" जन्म-10... View full profile
You may also like: