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सच तुम रूठ जाओ तो

भगवती प्रसाद व्यास

भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "

कविता

March 21, 2017

सच तुम रूठ जाओ तो
मनाने कासच तुम रूठ जाओ तो
मनाने का मज़ा कुछ और है !!

बातों बातों में ठुनकना !
होठों से निर्झरणी बहना !
भूकम्प के झटके से लगते
भरभरा चीजों का गिरना !
उस बिगड़े सन्तुलन का –
जब तब दिखता नहीं कोई ठौर है !

भाल की बिंदी बिदकना
और जुल्फों का बिखरना !
चूड़ियां ऊपर को चढ़ती
पल्लू का वो कमर कसना !
चिंगारियां आँखों में भड़के –
बस कब थमे, कब रुके यह दौर है !

हथेलियों का रगड़ खाना
मुठ्ठियों का बंध ही जाना !
तमतमाये गाल हों और
मुस्कराकर ख़म दिखाना !
इस वीरांगना के स्वागत में –
बस मुस्कराने का मज़ा कुछ और है !!

समर्पण मुझको है करना
कानों को है बन्द रखना !
घिरी है सावन बदरिया
भीगने से अब क्या डरना !
बिजलियाँ चमके तो चमके –
रिमझिम रिमझिम बूंदों का ही शोर है !!

बृज व्यास मज़ा कुछ और है !!

बातों बातों में ठुनकना !
होठों से निर्झरणी बहना !
भूकम्प के झटके से लगते
भरभरा चीजों का गिरना !
उस बिगड़े सन्तुलन का –
जब तब दिखता नहीं कोई ठौर है !

भाल की बिंदी बिदकना
और जुल्फों का बिखरना !
चूड़ियां ऊपर को चढ़ती
पल्लू का वो कमर कसना !
चिंगारियां आँखों में भड़के –
बस कब थमे, कब रुके यह दौर है !

हथेलियों का रगड़ खाना
मुठ्ठियों का बंध ही जाना !
तमतमाये गाल हों और
मुस्कराकर ख़म दिखाना !
इस वीरांगना के स्वागत में –
बस मुस्कराने का मज़ा कुछ और है !!

समर्पण मुझको है करना
कानों को है बन्द रखना !
घिरी है सावन बदरिया
भीगने से अब क्या डरना !
बिजलियाँ चमके तो चमके –
रिमझिम रिमझिम बूंदों का ही शोर है !!

बृज व्यास

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Author
भगवती प्रसाद व्यास
एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में... Read more