सच्चे प्रेम पत्र

प्रिय पूजा
बहुत कुछ कहना है और कह पाना मुश्किल सा है. शायद यही कारण है कि अभिव्यक्ति के लिए कागज-कलम से बेहतर साधन नहीं खोज पाया. यह मेरा पहला और अंतिम पत्र है. इस पत्र को कागज का मामूली टुकड़ा मत समझना. यह पत्र पिछले 8 सालों के एक-एक पल का दस्तावेज है. इन बीते सालों की मुझे वह हर तारीख याद है, जब मैं तुमसे मिला, तुमसे बातें किया या तुम्हारे घर गया. इन बीते सालों में मैंने जितनी बार भगवान का नाम नहीं लिया, उससे कहीं ज्यादा बार तुम्हारा नाम लिया है. तपस्या किया है मैंने, पूजा की है तुम्हारी. भले मैं तुम्हें बता न सका, पर यह तो भगवान ही जानता है कि मैं तुम्हें कितना पसंद करता हूं.
कुछ दिनों के बाद तुम्हारा जन्मदिन है. जन्मदिन की अग्रिम हार्दिक शुभकामनाएं. जन्मदिन पर मैं तुम्हारे घर आने की कोशिश करूंगा. इंसान प्यार, विश्वास और व्यवहार का भूखा होता है. यह बात भी सहीं है कि प्यार किसी लव-लेटर, ग्रीटिंग कार्ड या आई लव यू का मोहताज नहीं होता. मैं शादी के पक्षधर हो सकता हूं परंतु अंतर्जातीय विवाह में परिवार और समाज की सीमाएं सामने आकर खड़ी हो जाती है. अत: हमें आपस में दोस्ती का रिश्ता निभाना चाहिए. काश: मैं तुम्हारा साथ दे पाता. काश: तुम मेरी भावना समझ पाती.
तुम एक बहुत अच्छी, प्यारी और प्रखर बुद्धि की लड़की हो. तुम मेरी प्रेरणास्रोत हो. वैसे तो तुम स्वत: ही एक बहादूर लड़की हो, मैं तुम्हें क्या समझाऊं. मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि तुम हमेशा खुश रहो और जीवन की छोटी-छोटी विपत्तियों को हंसकर झेल सको. तुमने कभी मुझे चाकलेट खिलाया था. मैं उस दिन को कभी नहीं भूल सकता क्योंकि तुम ही पहली लड़की हो जिसने मुझे आत्मीयता से चाकलेट खिलाया.
जब भी मैंने तुमसे बात किया, हर बार मैंने तुम्हें मौका दिया, कि अगर तुम कुछ बोलना चाहती हो तो बोल सकती हो, कुछ बताना चाहती हो तो बता सकती हो. मगर एक भी बार तुमने मुझे अपने दिल की बात नहीं बताई. जब तक तुम मुझे बताओगी नहीं, मुझे कैसे मालूम चलेगा कि तुम क्या सोचती हो, क्या चाहती हो.
इंसान गिरकर ही संभलना सीखता है परंतु संभलने के लिए गिरना जरूरी नहीं, गिरने से पहले भी संभला जा सकता है. कुछ-कुछ बातें ऐसी होती है जिसे सिर्फ सुनकर मानना पड़ता है. हमने सुना है, आग से जल जाते हैं, इस बात को परखने के लिए हमें आग में हाथ डालने की कतई आवश्यकता नहीं होती. हमें सिर्फ सुनकर विश्वास करना पड़ता है.
मेरी कुछ बातें हमेशा याद रखना. अकेलेपन से कभी मत घबराना, क्योंकि यही वह क्षण होगा जब तुम अपने आप को परख सकोगी. कभी किसी से मत डरना. हमेशा सच्चाई का साथ देना. गलत बातों का हमेशा विरोध करना. कभी किसी को अपने घर वालों पर ऊंगली उठाने का मौका मत देना. कभी ऐसी हरकत मत करना जिससे मुझे बुरा लगे या मुझे शर्मिंदा होना पड़े.
अगर जाने अनजाने में मुझसे कभी किसी भी प्रकार की कोई गलती हुई हो तो मैं क्षमाप्रार्थी हूं. अगर मेरे कारण कभी तुम्हारा दिल दुखा हो तो मुझे माफ कर देना.
अंत में इतना ही कहूंगा कि “पाना ही प्रेम नहीं, तुम मेरी हो इसका अहसास ही काफी है”
तुम्हारा शुभचिंतक
राज

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प्रिय राज
मुझे खुद को नहीं मालूम कि मैं कैसी लड़की हूं. मैं आपके दोस्ती के काबिल नहीं, फिर भी आप मुझे अपना दोस्त समझते हैं, यह सोचकर ही मुझे बहुत गर्व महसूस होता है. मुझे मालूम है कि, आप कभी भी मेरे जन्मदिन को नहीं भूल सकते. जन्मदिन पर मैं आपका इंतजार करती रही, परंतु आप नहीं आए. उस दिन मैं रो रही थी. रोने का कारण मैंने किसी को नहीं बताया क्योंकि मैं बता नहीं सकती थी. मैंने अपने आप को हमेशा अकेला ही पाया है. मुझे हमेशा ऐसा लगता है कि, मेरे गम का साथी कोई नहीं है और न ही मैं किसी को कुछ कह पाती हूं. मैं हमेशा खुश रहने की बाहरी दिखावा करती रहती हूं लेकिन मेरा मन हमेशा विचलित रहता है. मैं गिर भी जाऊं तो मुझे संभालने वाला मेरे साथ है. मैं अगर आग में जल भी जाऊं तो क्या फर्क पड़ता है. मुझे भी आपसे बातें करना अच्छा लगता है. राज, मैं आपके भावना को समझती हूं, फिर भी आपके दिल को चोट पहुंचाती हूं, प्लीज मुझे माफ कर देना. मुझे मालूम नहीं था कि आप मुझे इतना पसंद करते हो.
राज, कोई भी किसी को भी आई लव यू कह सकता है क्योंकि हम भारतीय हैं और भारतीयों में एक दूसरे के लिए प्यार ही प्यार भरा पड़ा है. मैं हमेशा आपसे कुछ बातें करना चाहती थी लेकिन मुझे मौका ही नहीं मिला. शायद किस्मत ने साथ नहीं दिया. मैंने सुना था, आपकी शादी होने वाली है. मुझे लगा, कोई तो मिली जो आपको अच्छी तरह समझ सकेगी. आप बताईए, शादी होने के बाद अपनी पत्नी को मेरा क्या परिचय देंगे ?
जो इंसान कभी किसी को थोड़ी सी खुशी नहीं दे सकती, वो भला किसी की प्रेरणा क्या बनेगी. मैंने ऐसा कोई काम नहीं किया जिससे आपको थोड़ी सी भी खुशी प्राप्त हुई हो. मैंने हमेशा आपका दिल दुखाया. आपको मेरे कारण बहुत ही तकलीफ उठानी पड़ी. मेरे ही कारण आपकी नींद खराब हुई. मेरे ही कारण आपको मानसिक चोटें पहुंची. मैं कभी भी आपको यह अहसास नहीं दिला पाई कि आपके लिए मेरे मन में कितनी श्रद्धा है. लेकिन मुझ जैसी बदनसीब कोई नहीं होगी जो आपके दोस्ती के लायक नहीं. आप जाने अनजाने की बात कर रहे हैं मैंने तो जानबुझकर आपका दिल दुखाया है.
राज, मैं हमेशा ही बाहर से हंसती रहती हूं. हमेशा सब को महसूस होता है कि, मैं कभी दुखी नहीं रहती. बाहर से मैं कितना भी मुस्कुराऊं लेकिन मेरी आंखें हमेशा नम रहती है. हमारा प्रेम निश्छल है, लेकिन प्रेम की उत्तमता सभी अपनों एवं परिवार और समाज की सीमाओं का ख्याल रखने में ही है. मैं यह कैसे भूल सकती हूं कि आपने मेरे जीवन में आशाओं के हजारों फूल खिलाए. मुझे जीवन की श्रेष्ठता से परिचित करवाया. तब आप मुझे आदर्श से लगे और धीरे-धीरे मेरा जीवन आप तक सिमट कर रह गया.
शायद मैंने कभी आपको चाकलेट खिलाया था लेकिन मैं इस काबिल भी नहीं थी कि, आपको चाकलेट खिलाऊं. इसी कारण आपने वही चाकलेट मुझे खिलाकर उस चाकलेट की सारी मिठास कम कर दी. लिखना तो बहुत कुछ चाहती हूं, पर लिख नहीं सकती. पता नहीं मेरी किस बात से आपको ठेस पहुंच जाए. आपकी दोस्ती मैं संभाल नहीं पाऊंगी, क्योंकि मैं कभी आपकी दोस्त बनने के लायक नहीं बन सकती. आपने मुझे “पूजा” जैसा पवित्र संबोधन दिया है. यकीन मानना, आपकी पूजा इस शब्द की पवित्रता और गरिमा हमेशा बनाए रखेगी.
आप बहुत ही अच्छे हैं, मैं कभी अच्छी नहीं थी जो आप जैसे इंसान को भी दुखी करती रही. मैं आपसे बात करना चाहती हूं लेकिन कर नहीं पाती, आपको कुछ बता नहीं पाती. यकीन मानिए, मैं ऐसी हरकत कभी नहीं करूंगी जिससे आपको बुरा लगे या आपको शर्मिंदा होना पड़े. आप बेफिक्र रहिए मैं कभी किसी को मेरे घर वालों पर ऊंगली उठाने का मौका नहीं दूंगी, इससे पहले मैं मरना पसंद करूंगी. गलती होने पर क्षमा करते रहना क्योंकि मैं आपसे छोटी हूं और छोटों को माफी मांगने का हक रहता है. अंत में इतना ही कहना चाहती हूं कि, “मैंने आज तक प्रेम की परिभाषा समझी नहीं, मैं आपकी हूं यह अहसास ही काफी है.
आपकी शुभाकांक्षी
पूजा

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