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सच्चे प्रहरी हो …

NIRA Rani

NIRA Rani

कविता

October 1, 2016

चैन से हम सो सके
इसलिए तुम गश्त लगाते हो

शेर की मॉद मे घुसकर के
तुम गीदड उसे बनाते हो

भारत के सच्चे प्रहरी हो
हर त्योहार वही मनाते हो

हम जब खुशी मनाते है
तुम देश की आन बचाते हो

देश के असली हीरो हो
गुमनामी मे खो जाते हो

चिराग तले अंधेरा होता है
यह एहसास दिलाते हो

तुम भारत के वो लाल हो
जो खुद हलाल हो जाते हो

सचमुच तुम सच्चे प्रहरी हो
भारतकी लाज बचाते हो
मस्तक ऊंचा करवाते हो

नमन तुम्हे हम सबका है
भारत का भाग्य जगाते हो ……
जय जवान

Author
NIRA Rani
साधारण सी ग्रहणी हूं ..इलाहाबाद युनिवर्सिटी से अंग्रेजी मे स्नातक हूं .बस भावनाओ मे भीगे लभ्जो को अल्फाज देने की कोशिश करती हूं ...साहित्यिक परिचय बस इतना की हिन्दी पसंद है..हिन्दी कविता एवं लेख लिखने का प्रयास करती हूं..
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