सच्चा प्यार

शीर्षक – सच्चा प्यार
===============
दिव्या की शादी का कार्ड देख, राजू की आंखे फटी की फटी रही गई, उसे पूरा मामला एक दम से समझ में आ गया कि दिव्या उसका फोन क्यों नहीं उठा रही थी ओर न ही बात कर रही थीl कार्ड को देख राजू की आँखो के सामने अंधेरा सा छा रहा था, वह समझ नहीं पा रहा था कि उसके प्यार में आख़िर कहाँ कमी रह गई जो दिव्या उसकी न होकर किसी ओर की होने जा रही थी l बचपन का प्यार थी वो, ऎसे कैसे कर सकती है, कितनी यादे जुड़ी हे मेरी उसके साथ, मन ही मन बड़बड़ा रहा था… तभी माँ की आवाज गूँजी, ‘बेटा वो तेरी फ्रेंड दिव्या आयी थी,शादी का कार्ड देने, तुझे घर भेजने को बोल कर गयी है… तू चला जाना उसके यहां’
‘ठीक है माँ, अभी जाता हूँ’ राजू ने कहा ओर पैदल ही दिव्या के घर की तरफ चल दिया, डोर बेल बजाई तो सामने दिव्या ही खड़ी थी… उसे देखते ही राजू भबक उठा ओर सवालों की झड़ी लगा दी….’ यह क्या है दिव्या? मेरे साथ ऎसा क्यो कर रही हो? आखिर मेरे प्यार में क्या कमी रह गई? तुम ऎसी तो न थी ‘
‘ अंदर आ जाओ’ दिव्या ने कहा
अंदर आते ही राजू ने फिर कहा… तुमने मेरी बात का जबाब नहीं दिया ‘
‘ क्या जवाब दू राजू, मै मजबूर हूँ, मुझे माफ कर दो ‘
‘ लेकिन क्यो दिव्या, तुम ओर तुम्हारा परिवार, सभी तो इस रिश्ते से खुश थे… फिर अचानक क्या हुआ’
‘कारण तुम्हारी वेरोजग़ारी राजू, मम्मी पापा को तुमसे अच्छा ओर नौकरी वाला लड़का मिल गया…ओर मम्मी पापा जो भी करेगे अच्छा ही करेगे… आखिर वही तो मेरी छोटी सी दुनिया है… मै इस दुनिया को खोना नहीं चाहती…. राजू ‘
‘ तुम मेरे साथ चलो दिव्या, हम दोनों एक अलग दुनिया बनाएगे…. ओर इस दुनिया से बहुत दूर चले जायेगे ‘
‘ मुझे माफ कर दो राजू, मै तुम्हारा साथ नहीं दे सकती.. हमारा प्यार इतना स्वार्थी तो नहीं हो सकता…..जो हम खुद की खुशी के लिए अपनी दुनिया ही भूला दे…. नहीं राजू मुझसे ऎसा नहीं होगा…. हमारा प्यार निस्वार्थ ओर निर्विकार है.. हमने एक दूजे को पाने के लिए तो प्यार नहीं किया था….. ‘
राजू प्यार की परिभाषा को समझ चुका था उसके चेहरे पर संतोष के भाव ओर आँखो में आँसू उमड़ रहे थे जो उसकी अपनी दिव्या को खुशहाल जीवन की दुआएं दे रहे थे… l

राघव दुबे’ रघु ‘
इटावा(उ0प्र0)
8439401034

Like Comment 0
Views 27

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share