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** सच्चा प्यार नहीं **

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

मुक्तक

October 2, 2017

घरबार बहुत द्वार बहुत है लेकिन सच्चा प्यार नहीं

दौलत की भरमार बहुत है लेकिन कारोबार नहीं

देखो सच्चा यार नहीं क्या दुनियां का व्यवहार यही

भूख है जीवन जीने की क्या इसका पारावार नहीं।।

?मधुप बैरागी

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Author
भूरचन्द जयपाल
From: मुक्ता प्रसाद नगर , बीकानेर ( राजस्थान )
मैं भूरचन्द जयपाल 13.7.2017 स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना... Read more
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