सच्चाई दिखलाता हूँ

नित्य कर्म की तरह सुबह कार्यशाला के लिए प्रस्थान करने से पहले
तैयार होते हुए जीवन की व्यस्तता में टीवी पर खबरे देख सुन रहा था !
कितनी करते है हम बड़ी बड़ी बाते शिक्षा और विकास का दम भरते है
दिखावे की दुनिया में जीते है आज भी हम ये ताना बाणा बुन रहा था !!
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हकीकत क्या है सही है या गतल है
तुमको मैं बतलाता हूँ !
हो सके तो दो पल को विचार करना
सच्चाई दिखलाता हूँ !
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पहली खबर में नव संवत्सर, हिंदी नववर्ष की मिली बधाई थी
दूजी खबर में नवरात्रो के प्रारम्भ की शुभकामनाये भी पाई थी
तीसरी खबर जैसे सुनी उसने मेरे दिल की दुनिया हिलाई थी
आज फिर एक लावारिश नवजात बच्ची कूड़े के ढेर में पाई थी !!
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डी. के. निवातिया

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