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सखी

मधुसूदन गौतम

मधुसूदन गौतम

कविता

April 2, 2017

बात हुई तुमसे री सखी।
सारी बाते ही तुम्हे लिखी।
पर देखो किस्मत का फेर
सारी बातें कही और दिखी।
नाम तुम्हारा देख न पाया।
अति आनदं था मन समाया।
बस लिख दी सब मन की।
जिसने पढ़ा वो समझ न पाया।
मै सोचा तुम निष्टुर हो गई।
या भावो में कहीं पे खो गई।
जवाब नही आया कोई तुमसे।
देखा तो गलती मुझसे हो गई।

Author
मधुसूदन गौतम
मै कविता गीत कहानी मुक्तक आदि लिखता हूँ। पर मुझे सेटल्ड नियमो से अलग हटकर जाने की आदत है। वर्तमान में राजस्थान सरकार के आधीन संचालित विद्यालय में व्याख्याता पद पर कार्यरत हूँ।
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