सखा मेरा , मुझको प्यारा

जिसको कहता मैं मित्र ।
दिल मे रखता उसका चित्र ।।
वो मेरा होता है अभिन्न ।
कैसे फिर मैं हो जाऊँ भिन्न ।।

अगर वो दुःख से पीड़ित ।
कैसे फिर मैं हो जाऊँ सीमित ।।
सखा मेरा, मुझको प्यारा ।
जग से लगता फिर वो न्यारा ।।

हम हर पल साथ रहते ।
दिल की बात सदा सुनाते ।।
एक दूजे पर विश्वास अटूट ।
सपने में भी नही जाता टूट ।।

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J P LOVEWANSHI, MA(HISTORY) ,MA (HINDI) & MSC (MATHS) , MA (POLITICAL SCIENCE) "कविता लिखना...
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