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संस्कार

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गीतिका
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आधार छंद —–सुमेरु (मापनी युक्त)
मापनी ———–1222 1222 122
तुकान्त—–आया ( समान्त–आया ,पदान्त–अपदान्त)
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हमारे देश में सब कुछ —-समाया।
यहाँ के संस्कारों ने ——सिखाया।

वृद्ध हैं जो उन्हें सम्मान —–देकर,
सदा छोटों ने उनसे प्यार —पाया।

बड़े ही पूजनीय अतिथि —–रहे हैं,
देकर सत्कार मन उनका रिझाया।

उपजते हों जहाँ अनुराग —-रिश्ते,
वही प्रेमिल सदन उर में —बसाया।

निराला है सभी राष्ट्रों में’ —-भारत,
सभी धर्मों के’ मिश्रण ने —सजाया।

हमें है गर्व भारत वर्ष ——-तुझ पर,
जगत में स्वाभिमानी नाम —-छाया।
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नीरज पुरोहित रूद्रप्रयाग(उत्तराखण्ड)

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Neeraj Purohit
Neeraj Purohit
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