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माँ/संसार

बृजेश कुमार नायक

बृजेश कुमार नायक

मुक्तक

February 11, 2017

स्वार्थी संसार , सब जन बुद्धि के कोहिनूर है |
आत्मा की किसे चिंता, जग का मन भरपूर हैं |
माँ, सघन जीवन-प्रदाता- प्यार का अनुपम सगुन|
शेष सब ढोते समय के शेर जैसे शूर हैं|

माता तेरा ऋणी यह, सचमुच असत् संसार है|
माँ अमल पोषण की देवी,प्रीतिमय आधार है |
आप बिन सारा ज़माना, पत्ता सूखी डाल का |
मातु नहिं तो बाल-जीवन में नहीं परिवार है |

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

उर=हृदय

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Author
बृजेश कुमार नायक
एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा जन्मतिथि-08-05-1961 प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" साक्षात्कार,युद्धरतआमआदमी सहित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेक सम्मानों एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी,जालौन निवास-सुभाष नगर,... Read more