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संपनो को दिल मे रखता संजोता हूं।

Vindhya Prakash Mishra

Vindhya Prakash Mishra

कविता

July 17, 2017

अपने अनुभव अनुभूति को शब्द मे पिरोता हूं
कल्पना मे घूमकर अपने मे खोता हूं।
गिर गिरकर सम्भलता पर चलता रहा हूं
संपनो को सचकरने मे दिन रात नही सोता हूं।
असफलता मित्र बन आ ही जाती पर
संपनो को दिल मे रखता संजोता हूं।

Author
Vindhya Prakash Mishra
Vindhya Prakash Mishra Teacher at Saryu indra mahavidyalaya Sangramgarh pratapgarh up Mo 9198989831 कवि, अध्यापक
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