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संजीदा तबियत की कहानी नहीं समझे

Aug 16, 2016 04:27 AM

संजीदा तबियत की कहानी नहीं समझे
आँखो में रहे फिर भी वो पानी नहीं समझे

एक शेर हुआ यूँ कि कलेजे से लगा है
दरया में उतर कर भी रवानी नहीं समझे

क्या खत में लिखा जाए कि समझाऐ उन्हें हम
जो सामने रह कर भी ज़बानी नहीं समझे

बचपन को लुटाया है जवानी के लिए यार
हम लोग जवानी को जवानी नहीं समझे

पहले तो कहा ‘राव’ कोई शेर सुनाओ
फ़िर दोस्त मेरी बात के म’आनी नहीं समझे

– नासिर राव

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Nasir Rao
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