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संघर्ष एक इतिहास

MridulC Srivastava

MridulC Srivastava

तेवरी

November 25, 2016

जुल्म_ए_खाकी या जुल्म_ए_खादी
अधिकार के संघर्ष का तो इतिहास रहा है,
किसी ने समर्पण किया है,तो कोई भक्त रहा है
मुझे याद है पुरुषर्थ पोरस का भी,
जिसने सूली पर चढ़ भी सत्रु को ललकार दिया है ।

Author
MridulC Srivastava
हीरे सजा रखे हैं तिलक सा माथे उन्हें माटी का कोई मोल नहीं, माटी ही हूं इस भूमि का,अभिमान मुझे, इस माटी का कोई मोल नहीं
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